उत्तराखंड : बर्थ सर्टिफिकेट बनवाने में देरी पड़ेगी भारी, सरकार ला रही सख्त नियम

  • 21 दिन तक आसान प्रक्रिया, इसके बाद बढ़ेंगी औपचारिकताएं।
  • उत्तराखंड में जन्म प्रमाण पत्र बनवाने वालों की संख्या में बड़ा उछाल।  

देहरादून। जन्म प्रमाण पत्र (बर्थ सर्टिफिकेट) अब केवल जन्म का रिकॉर्ड भर नहीं रह गया है, बल्कि यह नागरिक की पहचान और आयु का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज बन चुका है। आधार कार्ड, पासपोर्ट, स्कूल में प्रवेश और कई सरकारी सेवाओं के लिए इसकी अनिवार्यता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में केंद्र सरकार जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था को और अधिक सख्त और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। लोकसभा में 31 जुलाई 2026 को पारित जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक के लागू होने के बाद समय पर जन्म प्रमाण पत्र नहीं बनवाने वालों के लिए प्रक्रिया पहले की तुलना में काफी कठिन हो जाएगी।

उत्तराखंड में भी जन्म प्रमाण पत्र बनवाने वालों की संख्या में पिछले तीन वर्षों के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि, प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में तकनीकी कारणों और कार्यभार के चलते समय पर प्रमाण पत्र जारी न होने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।

2023 के बाद बढ़ा जन्म प्रमाण पत्र का महत्व

साल 2023 में केंद्र सरकार ने जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम में संशोधन किया था। इसके बाद 1 अक्टूबर 2023 से जन्म लेने वाले बच्चों के लिए जन्म प्रमाण पत्र ही जन्मतिथि का प्रमुख और मान्य दस्तावेज बन गया। पहले हाईस्कूल प्रमाणपत्र सहित अन्य दस्तावेज भी आयु प्रमाण के रूप में मान्य थे, लेकिन अब जन्म प्रमाण पत्र का महत्व कई गुना बढ़ गया है।

इसी संशोधन के बाद जन्म और मृत्यु पंजीकरण प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल और राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत कर दिया गया। अब सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (सीआरएस) के माध्यम से ऑनलाइन प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं।

21 दिन तक आसान, उसके बाद कठिन होगी प्रक्रिया

वर्तमान व्यवस्था के अनुसार बच्चे के जन्म के 21 दिन के भीतर जन्म प्रमाण पत्र बनवाना निशुल्क और बेहद आसान है। 21 से 30 दिन के भीतर आवेदन करने पर अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है, जबकि 30 दिन से एक वर्ष के बीच तहसीलदार अथवा संबंधित अधिकारी की अनुमति आवश्यक होती है। नए संशोधन के लागू होने के बाद यदि जन्म के एक से दो वर्ष बाद प्रमाण पत्र बनवाने का आवेदन किया जाता है तो जिला मजिस्ट्रेट, एसडीएम अथवा अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अनुमति अनिवार्य होगी। वहीं दो वर्ष से अधिक की देरी होने पर प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही जन्म प्रमाण पत्र जारी किया जा सकेगा।

फर्जी दस्तावेजों पर लगेगी रोक

सरकार का उद्देश्य जन्म और मृत्यु से जुड़े रिकॉर्ड को अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाना है ताकि फर्जी प्रमाण पत्रों पर रोक लगाई जा सके। नया कानून लागू होने के बाद जन्म प्रमाण पत्र को विभिन्न सरकारी सेवाओं और प्रक्रियाओं में प्राथमिक दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।

उत्तराखंड में लगातार बढ़ रहे जन्म प्रमाण पत्र

उत्तराखंड में वर्ष 2023 में 2,27,990, वर्ष 2024 में 2,77,697 तथा वर्ष 2025 में 2,81,344 जन्म प्रमाण पत्र पंजीकृत किए गए। सबसे अधिक पंजीकरण देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जिलों में दर्ज हुए।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार वित्तीय वर्ष 2023-24 में प्रदेश में 1,51,007, वर्ष 2024-25 में 1,47,717 तथा वर्ष 2025-26 में 1,53,299 बच्चों का जन्म हुआ। इसके मुकाबले जारी किए गए जन्म प्रमाण पत्रों की संख्या अधिक रही, जो दर्शाती है कि पुराने लंबित मामलों का भी पंजीकरण किया गया।

सरकारी अस्पतालों में देरी बनी चुनौती

प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में कई बार तकनीकी दिक्कतों, ऑनलाइन प्रणाली में बाधा और कार्यभार अधिक होने के कारण जन्म प्रमाण पत्र समय पर जारी नहीं हो पाता। इसके चलते अभिभावकों को अस्पतालों और संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सभी अस्पतालों को समयबद्ध तरीके से प्रमाण पत्र जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।

बिना नाम के भी बन सकता है जन्म प्रमाण पत्र

विशेषज्ञों के अनुसार यदि जन्म के समय बच्चे का नाम तय नहीं हुआ है, तब भी बिना नाम के जन्म प्रमाण पत्र जारी किया जा सकता है। बाद में निर्धारित प्रक्रिया के तहत बच्चे का नाम प्रमाण पत्र में जोड़ा जा सकता है। इससे समय पर पंजीकरण सुनिश्चित किया जा सकता है।

क्या कहते हैं अधिकारी?

नागरिक पंजीकरण निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव के अनुसार जन्म प्रमाण पत्र अब नागरिक के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज बन चुका है। इसलिए अभिभावकों को बच्चे के जन्म के तुरंत बाद इसका पंजीकरण कराना चाहिए। समय बीतने पर प्रक्रिया अधिक जटिल हो जाती है और कई अतिरिक्त अनुमतियों की आवश्यकता पड़ती है।

वहीं स्वास्थ्य विभाग की निदेशक डॉ. शिखा जगपांगी ने कहा कि विभाग की कोशिश है कि सरकारी अस्पतालों में जन्म के कुछ दिनों के भीतर ही प्रमाण पत्र उपलब्ध करा दिया जाए। तकनीकी समस्याओं के बावजूद व्यवस्था को और बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्य बातें

  • जन्म प्रमाण पत्र अब सबसे महत्वपूर्ण पहचान दस्तावेजों में शामिल।
  • 21 दिन के भीतर प्रमाण पत्र बनवाना सबसे आसान और निशुल्क।
  • नए कानून के बाद देरी होने पर डीएम, एसडीएम या न्यायालय की अनुमति जरूरी होगी।
  • उत्तराखंड में पिछले तीन वर्षों में जन्म प्रमाण पत्र पंजीकरण में लगातार वृद्धि।
  • सरकार का उद्देश्य डिजिटल रिकॉर्ड को मजबूत करना और फर्जी प्रमाण पत्रों पर रोक लगाना।

Portaladmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

लोकसभा के संयुक्त निदेशक ने की आत्महत्या, 70 लाख के कर्ज से थे परेशान

Wed Aug 5 , 2026
नोएडा। नोएडा के सेक्टर-110 क्षेत्र में लोकसभा सचिवालय में कार्यरत संयुक्त निदेशक गौरव गौतम (40) ने कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद पुलिस को मौके से 10 पन्नों का एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें उन्होंने आर्थिक तंगी और करीब 70 लाख रुपये के कर्ज […]

You May Like

Breaking News

Share
error: Content is protected !!