ISRO में वैज्ञानिकों के इस्तीफों पर सरकार सख्त, VRS और त्यागपत्र मंजूरी के नियम बदले

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) से पिछले एक वर्ष के दौरान बड़ी संख्या में वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के इस्तीफे सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) और इस्तीफों की मंजूरी से जुड़े नियमों को सख्त कर दिया है। अंतरिक्ष विभाग (Department of Space) ने नया आंतरिक निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि अब महत्वपूर्ण अंतरिक्ष परियोजनाओं से जुड़े वैज्ञानिकों के इस्तीफे और वीआरएस के मामलों को सामान्य प्रक्रिया के तहत मंजूरी नहीं दी जाएगी।

नई व्यवस्था के अनुसार, ‘ग्रुप A’ के वैज्ञानिक एवं तकनीकी अधिकारियों के इस्तीफे या वीआरएस के सभी प्रस्ताव संबंधित केंद्रों से मुख्यालय भेजे जाएंगे, जहां अंतिम निर्णय लिया जाएगा। परियोजना निदेशकों और केंद्र निदेशकों को निर्देश दिए गए हैं कि राष्ट्रीय महत्व के मिशन पूरे होने तक ऐसे मामलों को स्वीकृति न दें।

बड़े मिशनों पर पड़ रहा असर

सूत्रों के अनुसार, हाल के महीनों में गगनयान, चंद्रयान-3 और अन्य महत्वपूर्ण अंतरिक्ष अभियानों से जुड़े कई वरिष्ठ वैज्ञानिक और परियोजना प्रबंधक निजी अंतरिक्ष कंपनियों का रुख कर चुके हैं। सरकार का मानना है कि अनुभवी वैज्ञानिकों के अचानक संस्थान छोड़ने से राष्ट्रीय परियोजनाओं की गति और गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

ISRO प्रमुख वी. नारायणन ने इस कदम को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताते हुए कहा है कि इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं की निरंतरता बनाए रखना और अचानक होने वाले मानव संसाधन संकट से बचाव करना है।

एक साल में 100 से अधिक इस्तीफों की चर्चा

हालांकि अंतरिक्ष विभाग ने आधिकारिक तौर पर इस्तीफा देने वाले वैज्ञानिकों की संख्या जारी नहीं की है, लेकिन विभिन्न सूत्रों के अनुसार पिछले एक वर्ष में करीब 100 से 120 वैज्ञानिक एवं तकनीकी विशेषज्ञ संगठन छोड़ चुके हैं।

बताया जाता है कि इस्तीफा देने वालों में विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर के LVM-3 परियोजना निदेशक विक्टर जोसेफ, यू.आर. राव सैटेलाइट सेंटर के SpaDeX परियोजना निदेशक तथा चंद्रयान-3 परियोजना से जुड़े वैज्ञानिक आदित्य रल्लापल्ली जैसे वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं।

प्रमुख केंद्रों में सबसे अधिक असर

सूत्रों के मुताबिक, यू.आर. राव सैटेलाइट सेंटर से लगभग 80 वैज्ञानिकों ने नौकरी छोड़ी है, जबकि विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर से भी करीब 20 वैज्ञानिकों के इस्तीफे की जानकारी सामने आई है। कुल कर्मचारियों की संख्या के मुकाबले यह प्रतिशत भले कम हो, लेकिन अनुभवी विशेषज्ञों के जाने से प्रमुख परियोजनाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

निजी स्पेस सेक्टर बना बड़ा आकर्षण

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में तेजी से हो रहे विस्तार के कारण अनुभवी वैज्ञानिकों की मांग लगातार बढ़ रही है। निजी कंपनियां बेहतर वेतन, आधुनिक कार्य वातावरण और आकर्षक करियर अवसर उपलब्ध करा रही हैं। यही कारण है कि ISRO के कई अनुभवी वैज्ञानिक निजी स्पेस कंपनियों का रुख कर रहे हैं।

सरकार को उम्मीद है कि नई नीति से महत्वपूर्ण अंतरिक्ष अभियानों में मानव संसाधन की उपलब्धता बनी रहेगी और रणनीतिक परियोजनाओं पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को कम किया जा सकेगा।

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